मेलसिथामूर तमिलनाडू का पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर : दक्षिण भारत की जैन धरोहर का गौरवशालीप्रतीक

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मेलसिथामूर/तमिलनाडू (मनोज जैन नायक, मुरैना) दक्षिण भारत की पावन भूमि पर स्थित 108 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर आज भी जैन धर्म, संस्कृति, कला और इतिहास की अमूल्य विरासत को संजोए हुए है। विलुप्पुरम जिले के मेलसिथामूर में स्थित यह प्राचीन जिनालय न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय स्थापत्य और सांस्कृतिक वैभव का भी अद्भुत उदाहरण है।
भव्य द्रविड़ शैली में निर्मित यह मंदिर दूर से ही अपनी विशालता और कलात्मक सौंदर्य से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर का ऊँचा गोपुरम, विशाल मंडप, नक्काशीदार स्तंभ तथा प्राचीन शिल्पकला दक्षिण भारत की समृद्ध स्थापत्य परंपरा का जीवंत परिचय कराते हैं। मंदिर परिसर में उपलब्ध अनेक शिलालेख इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित करते हैं तथा तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन पर प्रकाश डालते हैं।
मंदिर के मूलनायक भगवान 108 पार्श्वनाथ की दिव्य प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है। सप्तफणी नाग की छत्रछाया में विराजमान भगवान की शांत एवं ध्यानमग्न मुद्रा श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराती है। प्रतिमा की कलात्मकता और भव्यता मंदिर की गरिमा को और अधिक बढ़ा देती है।
इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के अनुसार मेलसिथामूर सदियों से जैन धर्म के अध्ययन, साधना और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। मंदिर परिसर में प्राप्त शिलालेखों से विभिन्न राजवंशों तथा दानवीरों द्वारा मंदिर के संरक्षण और विकास के प्रमाण मिलते हैं। यही कारण है कि यह स्थल केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंदिर के भीतर स्थित विभिन्न मंडपों, प्रतिमाओं और शिल्पाकृतियों में तत्कालीन कलाकारों की अद्भुत प्रतिभा देखने को मिलती है। प्रत्येक स्तंभ, प्रत्येक प्रतिमा और प्रत्येक शिलालेख अपने भीतर इतिहास का एक अध्याय है ।
आलेख – अंशुल शास्त्री, सांगानेर

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